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BSc I/II/III year Chemistry: रसायन शास्त्र || महत्वपूर्ण नोट्स ||

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सफ़रनामा

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@rakesh.sssingh    ये बच्चे  रोज अपनी सफ़र में निकलते हैं, पाठशाला के लिए....15 km दूर, पहाड़ी के उस पार  | पहाड़ी की  ढालानों  में ये बच्चियाँ  अपने सायकल से उतर कर  धीरे धीरे चढ़ते हुए, हांफते  हुए...रास्ते पर हमें मिली | मैंने रास्ते  में उन्हें  रोक कर  कुछ खाने को  दिए , जो  मैंने बैग में रखे थे ...फिर उनसे पूछा.. कौन सी कक्षा में पढ़ते हो ? ग्यारहवीं कक्षा  (उन्होंने कहा) पढ़ाई में मन लगता है ? हाँ  ....पर  (उसने कहा) पर क्या  ? वे दोनों अपने सिर झुका लिए, फिर मैंने उनसे आगे  पूछा, क्या बनना चाहती हो ? पढ़ लिख कर.... वक्त और  हालात जो बना दे (उसने कहा) छोटी उम्र में इतनी बड़ी बात कैसे कर लेती हो? सर ! आप ये जगह घुमिए ,  बहुत खूबसूरत है, लोग यहां की खूबसूरती देखने के लिए आते हैं, पीड़ा देखने कोई नहीं आता. . . . इतना कहकर वे जाने लगे . . . हमनें उन्हें रोककर , उनके हाथों में  एक एक कलम  देकर जाने दिए . . . वे मुस्कराते हुए पहाड़ी चढ़ने लगे. . . . मैं बाद...

|| आईना || The mirror image|व्यंग

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  ~ आइना ~ " जा के पहले अपनी शक्ल देख आईने में . . . फिर बात करना "  ये जो ताना जब किसी के ऊपर चिपकाया जाता है जैसे हम चिपकाते थे , खाने के बाद च्विंगम किसी की सीट पर,  तो सबसे पहले  जिसे शर्मिंदगी झेलनी पड़ती है वो है  "आइना"   अब ये मैं नहीं कह रहा ,,, खुद आइना अपनी आपबीती बता रहा है  आईना :   सच कहूं तो ऐसी ताने खाने के बाद तुम जो अपनी  भयानक शक्ल ले  कर मेरे पास आते हो न , मुझे तो इससे बहुत डर लगता है।  ऐसा लगता है जैसे तुम्हारा शक्ल मैंने बिगाड़ा हो।  तुम्हारी बेइज्जती से ज्यादा मुझे शर्मिंदगी महसूस होती हैं,,, और महसूस इसलिए भी होती है  क्योंकि जब भी तुम घर से बाहर निकलते हो मेरे सामने से, अपने बालों में जेल और चेहरे पर फेसियल क्रीम लगाकर ,,, और उसके बाद पब्लिक में ये सब कांड करके आते हो तो  ऐसा लगता है कि खुद ही कालीख पोत लूं ,,, तुम्हें पता है, न जाने कितने लोग मुझे देख कर अपने हज़ार सपने जीते है,,,,  न जानें कितने लोगों  का मैंने मनोबल बढ़ाया है,, लोग मुझे Confidence grower की तरह इस्तेम...

मैं बांटना चाहता हूं . . .||हिंदी कविता||

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                                                                                          मैं बांटना चाहता हूं . . . . मेरे हिस्से की ख़ुशी मेरे हिस्से की दुःख मेरे हिस्से की तकलीफ मेरे हिस्से का सुख मेरे हिस्से के अरमान मेरे हिस्से का रेगिस्तान  मेरे हिस्से का दर्द मेरे हिस्से का प्यार मेरे हिस्से की सांसें मेरा सूना संसार  सब कुछ. . . . जो मैं बांट सकूं । मैं बांटना चाहता हूं ।।  मेरी टूटी तक़दीर मेरे हाथों की धुँधली लकीर समेटे सारा समंदर आंखों में ठहरा मंजर टूटते ख्वाबों की वो बिजलियां सपनें बुनते वो रंगीन तितलियाँ किसी कोने में गुनगुनाता वह धुन हर लम्हें से मिलता सुकून मेरा आज , मेरा कल  मुझसे गुजरा मेरा हर पल  वह सब कुछ . . . . जो मैं बांट सकूं । मैं बांटना चाहता हूँ । © राकेश सिंह सिदार

कविता || पॉलिटिक्स ||

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  जिन्हें मतलब नहीं किसी से उन्हें बस दहशत फैलानी है  हवा में थोड़ा ज़हर तो घुले दवा हमें ही पिलानी है  हर काम जो आसान कर दे पैसा उन्हें खिलानी है  सत्ता का सिद्धान्त यहीं है  कुर्सी भी बचानी  है सरकार भी चलानी है    ©राकेश सिंह सिदार

ऐसा मेरा किसान || अन्नदाता : हिंदी कविता || ©शब्दों के रंगमंच ||

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©Rakeshsingh360.blogspot.com  ऐसा मेरा किसान है... खेतों में जिनके सपनें लहलहाते है, धरा पर जो उम्मीदों के हल चलाते है, जिनकी खुशियाँ चहकते हरियाली में है, जिनका जीवन, खिलते बाली में है, कुदरत के आगे भी जिनके आस न टूटे, हड्डी पिघल जाए मेहनत में, पर सांस न छूटे, चाहे तपन धूप की हो, या लड़ाई भूख की हो, कभी थकता नही वह ..चाहे वजन कितना भी दुख की हो । जिसकी मेहनत पर सारा जहाँ पलता है, हर बार वह जुल्म की आग में जलता है, फिर भी.... हाथ उसके जमीं से छूटते नहीं, कंधे झुक जाए पर हौसले टूटते नहीं, उसके कभी दिन नही ढलते .... हर बार वह मौसम की बदसलूकी सहता है, कभी खुद के कर्ज और अंदर के बोझ में रहता है। जिनकी सुनने को कोई तैयार नहीं है ... जिनकी उम्मीदें एक झूठी आस में गुजर जाता है, फिर, खुद को खत्म कर देने का रास्ता ही नजर आता है। शून्य सा जीवन... जिसे किसी दहाई का अनुमान नही.... अपनी लगन, परिश्रम पर कभी कोई गुमान नही, ऐसे सर्वत्यागी, पालनकर्ता को सहृदय सम्मान है , ऐसा मेरा किसान है... ऐसा मेरा किसान है...। ©rakeshsinghsidar

कुछ मिल रहा . . . कुछ खो रहा है || ©शब्दों के रंगमंच ||

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©rakeshsingh360.blogspot.com एक सपना.....जिसमें जी रहा हूं , एक हकीकत......जो हो रहा है  कुछ रख लूं समेट कर ... कुछ मिल रहा ...कुछ खो रहा है  कहीं खुशियों का समां, कहीं बादल है दुखों का ... थोड़ी राहत दे जाती है ये हमदर्दी ,लोगों का  हर स्वाद चखा दी ये जिन्दगी ....... हर रंग रंगा दी ये जिंदगी  ....... बस ..कुछ अच्छा है जो हो रहा है  कुछ मिल रहा ...कुछ खो रहा है ।। ©rakeshsinghsidar

|| मेरे अल्फ़ाज़ || ©rakeshsinghsidar

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   FIR लिखवानी है . . . सुकून !! खो गई है कहीं  जिसने हर मुसीबत का स्वाद चखा ।                      अपना कद वहीं सबसे ऊँचा रखा ।। किसी का षड्यंत्र  या  प्रकृति का प्रतिशोध या  हमारी लाचारी  या  राजनीतिक उत्सव या  प्रगतिशील मुल्क़ की विफ़लता या  हमारा डर . . .  आख़िर क्या है यह महामारी ! हर कोई पूछता है हाल मेरा आजकल । रखते हैं हर घड़ी ख्याल मेरा आजकल । न जाने कब छूटेगी  पीछा इस जुकाम से, भीगा है इसकदर रुमाल मेरा आजकल । Fear is connected to U.N.R.E.A.L.I.T.Y   ! तुम्हारा एक एक शब्द . .  वास्तविकता से लिपटा हुआ संवेदनाओं की असंख्य धाराएँ हैं ।। ये कैसी बहार आई है, डालियों में न कोई सूकून है, न हलचल हवाओं में । घुटने लगे हैं दम, जहर घुली है फिजाओं में । Nothing hurts more than.. Your Desire ! मैं हैरान हूँ . . .   कि ख़ुद के घर मेहमान हूँ । सपना सच में  सच लगता है  जब तक सपना सच में सच न हो ।। The favourite thing about myself is.... my Attitude 😎...

न जाने कितना दूर हूँ ...

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  हालातों से हूँ गुजरा मैं,                      इन हालातों में मजबूर हूँ,   जाना है मंजिल तक अपनी ,                        न जाने कितना दूर हूँ। इसी बहाने घर से निकला ,                      कि लम्बी राह पकड़नी है, भटकना ही था किस्मत में शायद ,                      अब किस्मत से ही लड़नी है। हारा नही हूँ अभी मैं ....माना थका ज़रूर हूँ जाना है मंजिल तक अपनी ,                     न जाने कितना दूर हूँ ।। © राकेश सिंह सिदार Download this Poem : 👇 https://www.yourquote.in/rakesh-singh-sidar-3lek/quotes/haalaaton-se-huun-gujraa-main-haalaaton-men-mjbuur-huun-hai-ksu37

सब धोखा है ... मोह एक भ्रम || हिंदी कविता

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पाप के घड़े भर भी जाते हैं  गंगा में स्नान से कट भी जाते हैं  पाप पुण्य का क्या लेखा-जोखा है मैं तो कहता हूं सब धोखा है । कण-कण में ईश्वर के अंश  प्राणी प्राणी में भगवान  छूत अछूत में क्या फर्क है बोलो आखिर हैं ही सब इंसान  ऊंच-नीच का क्या लेखा जोखा है  मैं तो कहता हूं सब धोखा है । पढ़ लिख कर भी अनपढ़ सा ज्ञान  अक्ल बेचकर यहां बने महान  आंख बंद कर सब सत्य है बोलो  चल पड़ी है मूर्खों की दुकान  जीवन के इस भ्रम का क्या लेखा-जोखा है मैं तो कहता हूं सब धोखा है । आकाश शून्य... पाताल शून्य...  शून्य में संसार रचा  कौन फरिश्ता मैं क्या जानूं जन्म से मायावी यह संसार बसा  दुःख को दुःख ना समझे जो  सुख का फिर क्या लेखा-जोखा है मैं तो कहता हूं सब धोखा है ।   ©rakeshsinghsidar #ज्यादा मोह रखना Injurious to health 😎 चाहे ईश्वर हो या इंसान 

मातृभाषा " हिंदी " पर अयोध्या सिंह उपाध्याय "हरिऔध" की रचना

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पड़ने लगती है पियूष की शिर पर धारा। पड़ने लगती है पियूष की शिर पर धारा। हो जाता है रुचिर ज्योति मय लोचन-तारा। बर बिनोद की लहर हृदय में है लहराती। कुछ बिजली सी दौड़ सब नसों में है जाती। आते ही मुख पर अति सुखद जिसका पावन नामही। इक्कीस कोटि-जन-पूजिता हिन्दी भाषा है वही।1। जिसने जग में जन्म दिया औ पोसा, पाला। जिसने यक यक लहू बूँद में जीवन डाला। उस माता के शुचि मुख से जो भाषा सीखी। उसके उर से लग जिसकी मधुराई चीखी। जिसके तुतला कर कथन से सुधाधार घर में बही। क्या उस भाषा का मोह कुछ हम लोगों को है नहीं।2। दो सूबों के भिन्न भिन्न बोली वाले जन। जब करते हैं खिन्न बने, मुख भर अवलोकन। जो भाषा उस समय काम उनके है आती। जो समस्त भारत भू में है समझी जाती। उस अति सरला उपयोगिनी हिन्दी भाषा के लिए। हम में कितने हैं जिन्होंने तन मन धान अर्पण किए।3। गुरु गोरख ने योग साधाकर जिसे जगाया। औ कबीर ने जिसमें अनहद नाद सुनाया। प्रेम रंग में रँगी भक्ति के रस में सानी। जिस में है श्रीगुरु नानक की पावन बानी। हैं जिस भाषा से ज्ञान मय आदि ग्रंथसाहब भरे। क्या उचित न...

Life is easy….ज़िन्दगी आसान है !

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A powerful Speech : Life is easy.... कुछ दिनों पहले मैं बस यूँ ही कुछ Ted Talks Youtube पर देख रहा था . Ted Talks में आप हर तरह के topics पर interesting talks देख सकते हैं . ऐसे ही देखते -देखते मेरी नज़र एक video पर पड़ी जिसका title था “Life is easy”  title interesting था , मैंने तुरंत उसे play कर दिया . और सचमुच ये एक बहुत ही inspiring talk थी . इसमें Thailand के एक simple से farmer, Jon Jandai की कहानी है, जिनका कहना है “Life is easy..why make it hard ?" और आज दुनिया भर से लोग उनसे सीखने आते हैं की लाइफ को आसान कैसे बनाया जाए . Friends, मैं उनकी इस talk से बहुत प्रभावित हूँ और इसीलिए मैं इसका text Hindi में translate कर के आप सबसे share कर रहा हूँ . I hope, मेरी तरह आप भी यहाँ से ज़रूर कुछ सीख पाएंगे . Life is easy.

" Life of Chemistry" Chem40 हिंदी कविता

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CHEM 40 The poetry on     "Life of Chemistry"     || FEB - 2014 ||              ©rakeshsinghsidar Dedicate to all...Masters of Science. जहाँ चाह थी वही राह बन गई भूली यादें उन पलो की ताजी रह गई एक सपना लिए निकल पड़े थे उस राह में Chemistry से भरी दुनिया की चाह में जिंदगी की दौड़ में भागते कब Bachelor हो गए Science में मास्टर बनते Natural हो गए Bachelor से मास्टर बनना जरूरी हो गया था , Chemistry से प्यार करना मजबूरी हो गया था । Life of Chemistry Chem40

जद्दोजहद ..जिंदगी की !!

जद्दोजहद ..जिंदगी की !! जब भी मै पीछे मुड़कर देखता हूँ... कभी यह नही सोचता कि "क्या खोया ,क्या पाया" बल्कि हमेशा ख्याल आता है कि "क्या खोजा क्या पाया "...... पापा बचपन में कहा करते थे कि  तुम्हें मेरे कंधो पर बैठ कर वह देखना है जो मैं नहीं देख सका .... आज जद्दोजहद इसलिए है कि... इस सोच ने बहुत बड़ा कैनवास तो दे दिया पर उस कैनवास पर  अपने रंगों से प्रभाव दिखाने की कोशिश अब भी जारी है•••••• इस वर्ष फिर वही संकल्प लेकर आगे बढ़ना है.... इसी बीच मुझे मेरी वो कविता याद आ जाती है कि ... "हारा नही हूँ अभी मैं माना थका ज़रूर हूँ जाना है मंजिल तक अपनी ...                       न जाने कितना दूर हूँ " आप सबको मेरी शुभकामनाएं ...मेरा प्यार।। ©rakeshsinghsidar

होना है रौशन तो.. by: My Friend Harish

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होना है रौशन तो ..... By: Harish Baghel My best motivator  and his most motivated  Poem ..!!!

Your Quote

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Your Quote : ©rakeshsinghsidar

यार ..यारी.. याराना..!!

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Yar.Yari.Yarana@pHgraphy #rakeshsingh360.blogspot.com यार... यारी ....याराना Dedicated to all my friends... तुम दोस्त भी अजीब हो यार .... तुम्हे क्या लगता है...कि सिर्फ तुम ही याद करते हो, हम नहीं.... । सिर्फ तुम ही याद कर मुस्कुराते हो, हम नहीं..... । गलतफहमी में जीते हो यार , कालेज से TC ले जाने से....क्या कभी कम हो जाता है प्यार तुम दोस्त भी अजीब हो यार... कोई कैसे भूल सकता है..... स्कूल, कालेज की कहानियों को, गलियों में दौड़ लगाते,बचपन की नादानियों को कोई कैसे भूल सकता है.... बैंच के उन शोरों को, चश्में लगाकर class में बैठे उन घोड़ो को । कोई कैसे भूल सकता है.... मैदान मार कर बैठे हम निठल्लों को सिनियरगीरी दिखाते उन आइन्स्टाइन के लल्लो को... कोई कैसे भूल सकता है.... घर की आँगन जैसा...दोस्तों का ये बाजार तुम दोस्त भी अजीब से यार.... मन में चाहे कुछ भी है...पर दिल में तेरी सच्चाई है, राह चलते कितने झगड़े,...पर तू अपना ही भाई है, राह बदले ..... यार बदले पर नही बदला ये याराना ... अब न जाने किस जनम मिलेगा वह साथ  पुराना व्यस्त रहो तुम, मस्त रहो तुम...जो भी ज...