जद्दोजहद ..जिंदगी की !!

जद्दोजहद ..जिंदगी की !!




जब भी मै पीछे मुड़कर देखता हूँ... कभी यह नही सोचता कि "क्या खोया ,क्या पाया" बल्कि हमेशा ख्याल आता है कि "क्या खोजा क्या पाया "......
पापा बचपन में कहा करते थे कि  तुम्हें मेरे कंधो पर बैठ कर वह देखना है जो मैं नहीं देख सका ....
आज जद्दोजहद इसलिए है कि... इस सोच ने बहुत बड़ा कैनवास तो दे दिया पर उस कैनवास पर  अपने रंगों से प्रभाव दिखाने की कोशिश अब भी जारी है••••••
इस वर्ष फिर वही संकल्प लेकर आगे बढ़ना है....

इसी बीच मुझे मेरी वो कविता याद आ जाती है
कि ...
"हारा नही हूँ अभी मैं माना थका ज़रूर हूँ
जाना है मंजिल तक अपनी ...
                      न जाने कितना दूर हूँ "
आप सबको मेरी शुभकामनाएं ...मेरा प्यार।।
©rakeshsinghsidar

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