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Showing posts with the label कलमकार

मैं बांटना चाहता हूं . . .||हिंदी कविता||

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                                                                                          मैं बांटना चाहता हूं . . . . मेरे हिस्से की ख़ुशी मेरे हिस्से की दुःख मेरे हिस्से की तकलीफ मेरे हिस्से का सुख मेरे हिस्से के अरमान मेरे हिस्से का रेगिस्तान  मेरे हिस्से का दर्द मेरे हिस्से का प्यार मेरे हिस्से की सांसें मेरा सूना संसार  सब कुछ. . . . जो मैं बांट सकूं । मैं बांटना चाहता हूं ।।  मेरी टूटी तक़दीर मेरे हाथों की धुँधली लकीर समेटे सारा समंदर आंखों में ठहरा मंजर टूटते ख्वाबों की वो बिजलियां सपनें बुनते वो रंगीन तितलियाँ किसी कोने में गुनगुनाता वह धुन हर लम्हें से मिलता सुकून मेरा आज , मेरा कल  मुझसे गुजरा मेरा हर पल  वह सब कुछ . . . . जो मैं बांट सकूं । मैं बांटना चाहता हूँ । © राकेश सिंह सिदार

कविता || पॉलिटिक्स ||

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  जिन्हें मतलब नहीं किसी से उन्हें बस दहशत फैलानी है  हवा में थोड़ा ज़हर तो घुले दवा हमें ही पिलानी है  हर काम जो आसान कर दे पैसा उन्हें खिलानी है  सत्ता का सिद्धान्त यहीं है  कुर्सी भी बचानी  है सरकार भी चलानी है    ©राकेश सिंह सिदार

ऐसा मेरा किसान || अन्नदाता : हिंदी कविता || ©शब्दों के रंगमंच ||

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©Rakeshsingh360.blogspot.com  ऐसा मेरा किसान है... खेतों में जिनके सपनें लहलहाते है, धरा पर जो उम्मीदों के हल चलाते है, जिनकी खुशियाँ चहकते हरियाली में है, जिनका जीवन, खिलते बाली में है, कुदरत के आगे भी जिनके आस न टूटे, हड्डी पिघल जाए मेहनत में, पर सांस न छूटे, चाहे तपन धूप की हो, या लड़ाई भूख की हो, कभी थकता नही वह ..चाहे वजन कितना भी दुख की हो । जिसकी मेहनत पर सारा जहाँ पलता है, हर बार वह जुल्म की आग में जलता है, फिर भी.... हाथ उसके जमीं से छूटते नहीं, कंधे झुक जाए पर हौसले टूटते नहीं, उसके कभी दिन नही ढलते .... हर बार वह मौसम की बदसलूकी सहता है, कभी खुद के कर्ज और अंदर के बोझ में रहता है। जिनकी सुनने को कोई तैयार नहीं है ... जिनकी उम्मीदें एक झूठी आस में गुजर जाता है, फिर, खुद को खत्म कर देने का रास्ता ही नजर आता है। शून्य सा जीवन... जिसे किसी दहाई का अनुमान नही.... अपनी लगन, परिश्रम पर कभी कोई गुमान नही, ऐसे सर्वत्यागी, पालनकर्ता को सहृदय सम्मान है , ऐसा मेरा किसान है... ऐसा मेरा किसान है...। ©rakeshsinghsidar

कुछ मिल रहा . . . कुछ खो रहा है || ©शब्दों के रंगमंच ||

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©rakeshsingh360.blogspot.com एक सपना.....जिसमें जी रहा हूं , एक हकीकत......जो हो रहा है  कुछ रख लूं समेट कर ... कुछ मिल रहा ...कुछ खो रहा है  कहीं खुशियों का समां, कहीं बादल है दुखों का ... थोड़ी राहत दे जाती है ये हमदर्दी ,लोगों का  हर स्वाद चखा दी ये जिन्दगी ....... हर रंग रंगा दी ये जिंदगी  ....... बस ..कुछ अच्छा है जो हो रहा है  कुछ मिल रहा ...कुछ खो रहा है ।। ©rakeshsinghsidar

न जाने कितना दूर हूँ ...

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  हालातों से हूँ गुजरा मैं,                      इन हालातों में मजबूर हूँ,   जाना है मंजिल तक अपनी ,                        न जाने कितना दूर हूँ। इसी बहाने घर से निकला ,                      कि लम्बी राह पकड़नी है, भटकना ही था किस्मत में शायद ,                      अब किस्मत से ही लड़नी है। हारा नही हूँ अभी मैं ....माना थका ज़रूर हूँ जाना है मंजिल तक अपनी ,                     न जाने कितना दूर हूँ ।। © राकेश सिंह सिदार Download this Poem : 👇 https://www.yourquote.in/rakesh-singh-sidar-3lek/quotes/haalaaton-se-huun-gujraa-main-haalaaton-men-mjbuur-huun-hai-ksu37

सब धोखा है ... मोह एक भ्रम || हिंदी कविता

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पाप के घड़े भर भी जाते हैं  गंगा में स्नान से कट भी जाते हैं  पाप पुण्य का क्या लेखा-जोखा है मैं तो कहता हूं सब धोखा है । कण-कण में ईश्वर के अंश  प्राणी प्राणी में भगवान  छूत अछूत में क्या फर्क है बोलो आखिर हैं ही सब इंसान  ऊंच-नीच का क्या लेखा जोखा है  मैं तो कहता हूं सब धोखा है । पढ़ लिख कर भी अनपढ़ सा ज्ञान  अक्ल बेचकर यहां बने महान  आंख बंद कर सब सत्य है बोलो  चल पड़ी है मूर्खों की दुकान  जीवन के इस भ्रम का क्या लेखा-जोखा है मैं तो कहता हूं सब धोखा है । आकाश शून्य... पाताल शून्य...  शून्य में संसार रचा  कौन फरिश्ता मैं क्या जानूं जन्म से मायावी यह संसार बसा  दुःख को दुःख ना समझे जो  सुख का फिर क्या लेखा-जोखा है मैं तो कहता हूं सब धोखा है ।   ©rakeshsinghsidar #ज्यादा मोह रखना Injurious to health 😎 चाहे ईश्वर हो या इंसान 

" Life of Chemistry" Chem40 हिंदी कविता

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CHEM 40 The poetry on     "Life of Chemistry"     || FEB - 2014 ||              ©rakeshsinghsidar Dedicate to all...Masters of Science. जहाँ चाह थी वही राह बन गई भूली यादें उन पलो की ताजी रह गई एक सपना लिए निकल पड़े थे उस राह में Chemistry से भरी दुनिया की चाह में जिंदगी की दौड़ में भागते कब Bachelor हो गए Science में मास्टर बनते Natural हो गए Bachelor से मास्टर बनना जरूरी हो गया था , Chemistry से प्यार करना मजबूरी हो गया था । Life of Chemistry Chem40

होना है रौशन तो.. by: My Friend Harish

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होना है रौशन तो ..... By: Harish Baghel My best motivator  and his most motivated  Poem ..!!!

यार ..यारी.. याराना..!!

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Yar.Yari.Yarana@pHgraphy #rakeshsingh360.blogspot.com यार... यारी ....याराना Dedicated to all my friends... तुम दोस्त भी अजीब हो यार .... तुम्हे क्या लगता है...कि सिर्फ तुम ही याद करते हो, हम नहीं.... । सिर्फ तुम ही याद कर मुस्कुराते हो, हम नहीं..... । गलतफहमी में जीते हो यार , कालेज से TC ले जाने से....क्या कभी कम हो जाता है प्यार तुम दोस्त भी अजीब हो यार... कोई कैसे भूल सकता है..... स्कूल, कालेज की कहानियों को, गलियों में दौड़ लगाते,बचपन की नादानियों को कोई कैसे भूल सकता है.... बैंच के उन शोरों को, चश्में लगाकर class में बैठे उन घोड़ो को । कोई कैसे भूल सकता है.... मैदान मार कर बैठे हम निठल्लों को सिनियरगीरी दिखाते उन आइन्स्टाइन के लल्लो को... कोई कैसे भूल सकता है.... घर की आँगन जैसा...दोस्तों का ये बाजार तुम दोस्त भी अजीब से यार.... मन में चाहे कुछ भी है...पर दिल में तेरी सच्चाई है, राह चलते कितने झगड़े,...पर तू अपना ही भाई है, राह बदले ..... यार बदले पर नही बदला ये याराना ... अब न जाने किस जनम मिलेगा वह साथ  पुराना व्यस्त रहो तुम, मस्त रहो तुम...जो भी ज...