|| मेरे अल्फ़ाज़ || ©rakeshsinghsidar
FIR लिखवानी है . . . सुकून !! खो गई है कहीं जिसने हर मुसीबत का स्वाद चखा । अपना कद वहीं सबसे ऊँचा रखा ।। किसी का षड्यंत्र या प्रकृति का प्रतिशोध या हमारी लाचारी या राजनीतिक उत्सव या प्रगतिशील मुल्क़ की विफ़लता या हमारा डर . . . आख़िर क्या है यह महामारी ! हर कोई पूछता है हाल मेरा आजकल । रखते हैं हर घड़ी ख्याल मेरा आजकल । न जाने कब छूटेगी पीछा इस जुकाम से, भीगा है इसकदर रुमाल मेरा आजकल । Fear is connected to U.N.R.E.A.L.I.T.Y ! तुम्हारा एक एक शब्द . . वास्तविकता से लिपटा हुआ संवेदनाओं की असंख्य धाराएँ हैं ।। ये कैसी बहार आई है, डालियों में न कोई सूकून है, न हलचल हवाओं में । घुटने लगे हैं दम, जहर घुली है फिजाओं में । Nothing hurts more than.. Your Desire ! मैं हैरान हूँ . . . कि ख़ुद के घर मेहमान हूँ । सपना सच में सच लगता है जब तक सपना सच में सच न हो ।। The favourite thing about myself is.... my Attitude 😎...