कुछ मिल रहा . . . कुछ खो रहा है || ©शब्दों के रंगमंच ||


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एक सपना.....जिसमें जी रहा हूं ,

एक हकीकत......जो हो रहा है 

कुछ रख लूं समेट कर ...

कुछ मिल रहा ...कुछ खो रहा है 

कहीं खुशियों का समां, कहीं बादल है दुखों का ...

थोड़ी राहत दे जाती है ये हमदर्दी ,लोगों का 

हर स्वाद चखा दी ये जिन्दगी .......

हर रंग रंगा दी ये जिंदगी  .......

बस ..कुछ अच्छा है जो हो रहा है 

कुछ मिल रहा ...कुछ खो रहा है ।।


©rakeshsinghsidar


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