सफ़रनामा


@rakesh.sssingh 


 






ये बच्चे  रोज अपनी सफ़र में निकलते हैं, पाठशाला के लिए....15 km दूर, पहाड़ी के उस पार  |


पहाड़ी की  ढालानों  में ये बच्चियाँ  अपने सायकल से उतर कर  धीरे धीरे चढ़ते हुए, हांफते  हुए...रास्ते पर हमें मिली |

मैंने रास्ते  में उन्हें  रोक कर  कुछ खाने को  दिए , जो  मैंने बैग में रखे थे ...फिर उनसे पूछा..

कौन सी कक्षा में पढ़ते हो ?
ग्यारहवीं कक्षा  (उन्होंने कहा)

पढ़ाई में मन लगता है ?
हाँ  ....पर  (उसने कहा)

पर क्या  ?

वे दोनों अपने सिर झुका लिए, फिर मैंने उनसे आगे  पूछा,

क्या बनना चाहती हो ? पढ़ लिख कर....
वक्त और  हालात जो बना दे (उसने कहा)


छोटी उम्र में इतनी बड़ी बात कैसे कर लेती हो?


सर ! आप ये जगह घुमिए ,  बहुत खूबसूरत है, लोग यहां की खूबसूरती देखने के लिए आते हैं,

पीड़ा देखने कोई नहीं आता. . . .


इतना कहकर वे जाने लगे . . .

हमनें उन्हें रोककर , उनके हाथों में  एक एक कलम  देकर जाने दिए . . . वे मुस्कराते हुए पहाड़ी चढ़ने लगे.
. . .

मैं बादलों में पहाड़ों की ऊंची चढ़ान से ज्यादा ऊंचे,उनके अरमानों को देखता रहा . . . .
उनके ख्वाब और ख्वाहिशें, लगता है इन जंगलों में कैद हो गई है कहीं  . . . .


@rakeshsinghsidar/सफ़रनामा 

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