मैं बांटना चाहता हूं . . .||हिंदी कविता||
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मैं बांटना चाहता हूं . . . .
मेरे हिस्से की ख़ुशी
मेरे हिस्से की दुःख
मेरे हिस्से की तकलीफ
मेरे हिस्से का सुख
मेरे हिस्से के अरमान
मेरे हिस्से का रेगिस्तान
मेरे हिस्से का दर्द
मेरे हिस्से का प्यार
मेरे हिस्से की सांसें
मेरा सूना संसार
सब कुछ. . . . जो मैं बांट सकूं ।
मैं बांटना चाहता हूं ।।
मेरी टूटी तक़दीर
मेरे हाथों की धुँधली लकीर
समेटे सारा समंदर
आंखों में ठहरा मंजर
टूटते ख्वाबों की वो बिजलियां
सपनें बुनते वो रंगीन तितलियाँ
किसी कोने में गुनगुनाता वह धुन
हर लम्हें से मिलता सुकून
मेरा आज , मेरा कल
मुझसे गुजरा मेरा हर पल
वह सब कुछ . . . . जो मैं बांट सकूं ।
मैं बांटना चाहता हूँ ।
© राकेश सिंह सिदार

Beautiful lines Bhaiya.. keep going..🥳✌️👍
ReplyDeleteThank you so much 🙂😊😊😊
Deleteसुकून का दुसरा नाम आपके द्वारा लिखे लेख पढ़ना है।बहुत सुन्दर रचना दादा, लगे रहो 🙏🏻
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