" Life of Chemistry" Chem40 हिंदी कविता

CHEM 40

The poetry on   "Life of Chemistry"    

|| FEB - 2014 ||

             ©rakeshsinghsidar


Dedicate to all...Masters of Science.

जहाँ चाह थी वही राह बन गई
भूली यादें उन पलो की ताजी रह गई
एक सपना लिए निकल पड़े थे उस राह में
Chemistry से भरी दुनिया की चाह में
जिंदगी की दौड़ में भागते कब Bachelor हो गए
Science में मास्टर बनते Natural हो गए
Bachelor से मास्टर बनना जरूरी हो गया था ,
Chemistry से प्यार करना मजबूरी हो गया था ।

Life of Chemistry Chem40




@ 1st day of the Class @

उस दिन Class में कुछ अजीब लग रहा था
नये चेहरे,नये दोस्त,नया महौल
मानो सब कुछ करीब लग रहा था ।
कुछ डर, कुछ मायूसी, फिर भी आँखो में खुशी थे
कुछ पुराने दोस्त के न होने पर दु:खी ये ।

हम एक परिवार का हिस्सा बन गये थे
सब एक दुसरे से हाथ आगे बढ़ा रहे थे ।
एक ही college से जो आए ,आँखे गड़ा रहे थे।
शिष्टाचार का रंग हम पर यूं मचलते थे
कि "तू" की जगह मुंह से "आप" निकलते थे

धीरे से class में Professor की entry होता है
Attendance और Intro लेकर निकलना होता है
फिर लड़कियो की वही आदत शुरू हो जाती है
उनकी ची-ची में लड़को की Silent Word खो जाती है
Students में तू-तू...मैं-मैं आसान होता है
Class की ऐसी उलझनों से हर कोई परेशान होता है
तभी एक Topper भीड़ में से खड़ा होता है
जो ऐसी दंगो में कई-बार लड़ा होता है

पूरे class की बागडोर उसके ऊपर आ जाती है
रोज का बक-बक उसका दिमाग खा जाती है।

अब तो हम एक दुसरे को जानने लगे थे
बिना नाम जाने फिर भी पहचानने लगे थे
Thermodynamic stability हमारी बढ़ती जा रही थी
बिन पिये Alcohol का खुमार चढ़ती जा रही थी।

जो ख्वाब लेकर आए है वो बुनने लगे थे
इलेक्ट्रॉनों के साथ Low से High energy में कूदने लगे थे

@ Intermediate Stage @

जिंदगी अब दोस्तों में बस गई थी,
हर चीज खुद को बदलने लगी थी
एक दुसरे को खूब लड़ाने लगे थे
कभी चुप थे मुंह आज बड़बड़ाने लगे थे
मर्जी के मालिक खुद बन गये थे
NET - JRF की दौड़ में कूद गये थे

इलेक्ट्रॉनों के साथ चक्कर लगाना खूब भाता था
Non-Reactive से React होना हमें आता था

 एक जूनून था कुछ  नया करने का ....
एक जुनून था कुछ हासिल करने का ....
कुछ अरमान थे उसके दिल में, फिर बोल न पाता था...
HOD को देखते सारा जुनून उतर जाता था ...

घण्टो भर की Lecture .. . . .
किसी के लिए सपनों की उड़ान थी . . .
किसी के लिए उनकी गूंज में बंद जुबान थी,
फिर भी हम उस महौल में जी लिया करते थे
सामना करने की हिम्मत सीनियर्स जो दिया करते थे

सभी  Professor की Wavelength अलग अलग होती है
किसी की High तो किसी की Low होती है....
कुछ की Micro-processor... Very Slow होती है
और जो बाकी बचे. . .
     उनकी concept ही Over-flow होती है...

Class तो अब एक मजाक बन गया था
फिर भी हम Serious थे ...

हमारी दोस्ती की Wi-Fi हमेशा On रहती
दिल और दिमाग हमेंशा खुले रहते थे,
Theory & Practical गला दबाने को तुले रहते थे ।
Madom के ताने से कोई न बच पाता था
Lab में घुसते ही Lunch का खाना पच जाता था ..

सारे Radical लुका छुपी खेलने की जिद करते
पूरे Lab हमारी आँखे नोचते, बोलते हमें क्यो नही खोजते
Given mixture में छिपे elements भी इतलाने लगे थे ...

एक बोला -  मुझे तो निकाल लेगा, पर मेरे
भाई-बहनो...CO3, NO2, SO4 को न निकाल पाएगा,
तू  Practical करते-करते थक जाएगा
क्योकि तेरे से Test ही नही आएगा...

मैं बोला -  तू चुपचाप बाहर आ जा,
अभी  तेरे बिरादरी के भी बचे है
मेरा दिमाग  पूरा मत खा जा ....
Centrifuge में लेकर ऐसे घुमाऊंगा, कि घूमता रह जाएगा
जिंदगी भर तू अपना टेस्ट ही भूल जाएगा।

हम परेशान थे उनकी परेशानी बनकर
किस्से अधूरे रह गये थे कहानी बनकर

यही सिखने और सिखाने का दौर था ...
जीतने और जिताने का दौर था
 वो दौर था साबित करने का
                 वो दौर था इम्तिहान का.....

@ Exam Time @

ऐसा भी दिन क्यों आता है
दाँत दिखाते मुस्कुराते लम्हों को नजर लग जाता है

अब तो exams की लू चलने लगी थी,
- Facebook ,What's App, से ध्यान हटने लगी
Menu Card में भी Syllabus दिखने लगा था
पढ़ाई का भूत धीरे-धीरे उतरने लगा था
पूरे semester... Vogel & Banwell का आतंक था
इनसे छूटकारा ,हमारी class का सबसे बड़ा जंग था।
यूँ तो सपनो में भी आने लगे थे,
VBT और MOT का राग गाने लगे थे।

हमारी हमेंशा ये आदत रहती थी,
पूरे Semesters दिमाग खाली रहती थी।
वो समय ही कुछ ऐसा था....
चाहे नींद की कितनी भी गोलियाँ खां ले...
नीद न आती थी
जम्हाई लेते लेते सुबह हो जाती थी

बाकी दिन भगवान को कभी Time न देते,
और उस दिन साक्षात देवी दर्शन हो जाते
Que. Paper, देख के मन ही मन रोने लगते थे
Exam hall मे सारे Concept Vaporize होने लगते थे...

exam hall से कोई मुंह लटकाए निकलते थे
तो कोई हँसते हुए कमर मचकाए निकलते थे

@ Exam का Last Paper .....

उस दिन सवाल चाहे कितना भी कठिन हो
Answer Sheet यूँ भर जाता था
Hall में बैठे-बैठे Movie का प्लान बन जाता था
कैसे बना ? क्या-क्या बना ? काहे का बना.....
मानो... Girls,.....enquiry कर रही हो,
ये उनकी बुरी लत जो कभी नही जाएगी

और  Boys .....
एक लम्बी गहरी साँस लेते , अधूरी नींद पूरी करते

फिर क्या . . . . .
- हम दोस्तों की Online दरवाजे
    खुल जाते facebook पर
और धूल जमने लग जाते उन Note book पर . . . ।

@ When Results come..

Result के काले बादल मण्डरा रहे थे
नम्बरो की बारिश होने वाली थी
कहीं अधिक बारिश तो कहीं सूखा भी पड़ सकता था
कोई अंडर-50 तो कोई शतक भी जड़ सकता था

हकीकत सामने आने लगे थे
हम कितने पानी में है, जानने लगे थे
एक डर था जरूर, जिम्मेदारियाँ जो थी. . .
खुद पर विश्वास था,  मेहनत जो थी . . .
कोई first आता है , कोई Last आता है
अरमानों भरा बीकर वही टूट जाता है
                   . . . . जब कोई Last आता है
Life ! Unsaturated Hydrocarbon की तरह हो गई थी

Benzeldehyde का कड़वा घूट पीकर, हम तिलमिलाते रहे
. . . . सिवाय Physical बाकी तीनो के सहारे थे,
भाई श्रोडिंजर ! हमने तेरा क्या बिगाड़े थे . . .
तुम खानदानी मुसीबत देने वाले होते हो,
समझ न आने वाली बड़ी-बड़ी concept पाले होते हो।

कुछ चेहरों पर मुस्कान थी,
कुछ उलझन में थे
कुछ इन तकलीफों से निकलने की सूलझन में थे।

जिंदगी तो एक Race है अभी से हार क्यों मानना
Numbers कम हो जाने से,
आगे बढ़ने का जूनून कम नही होता
गर हौसला हो बुलंद . . . .
किसी में गिराने का दम नहीं होता।

उम्मीदों का घड़ा टूट गया तो क्या .....
सपने कभी टूटा नही करते,
साथ जो चले वो दोस्ती, कभी छूटा नही करते
जिंदगी में हमारे बीच कभी खटास न हो....
हमेंशा मिठास हो !!!

खुदा करे सभी को वो मुकाम मिल जाए
जिस ओर चले आए हम
"एक पहचान बनाए मिलकर . . .
जैसे "CHEM-40" कहलाएं हम . . ।।।

By- © RAKESH SINGH SIDAR.

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