न जाने कितना दूर हूँ ...
हालातों से हूँ गुजरा मैं, इन हालातों में मजबूर हूँ, जाना है मंजिल तक अपनी , न जाने कितना दूर हूँ। इसी बहाने घर से निकला , कि लम्बी राह पकड़नी है, भटकना ही था किस्मत में शायद , अब किस्मत से ही लड़नी है। हारा नही हूँ अभी मैं ....माना थका ज़रूर हूँ जाना है मंजिल तक अपनी , न जाने कितना दूर हूँ ।। © राकेश सिंह सिदार Download this Poem : 👇 https://www.yourquote.in/rakesh-singh-sidar-3lek/quotes/haalaaton-se-huun-gujraa-main-haalaaton-men-mjbuur-huun-hai-ksu37